फ्रेंडशिप डे पर विशेष- यादगार पलों में सिमटी दोस्ती

फ्रेंडशिप डे यानी दोस्ती का वो दिन जब हम अपने दोस्तों और दोस्ती के लिए शुभकामनायें मांगते है। दुआ करते हैं कि हमारे अच्छे दोस्त हमेशा ही हमारे साथ बने रहे। लेकिन हम में से शायद बहुत से लोगों को इस दिन के पीछे का इतिहास नहीं पता होगा। मतलब ये दिन क्यों मनाया जाता है? साल भर में केवल इस दिन को फ्रेंडशिप डे क्यों कहा जाता है? क्या सभी देशों में यह दिन एक ही दिन मनाया जाता है या अलग-अलग दिन? आखिर क्यों हम दोस्ती के इस दिन को इतना तवज्जो देते हैं? क्यों इस दिन हम अपने घर में एलबम्स खोल खोल कर पुरानी तस्वीरों को देखकर अपने दोस्तों के साथ बिताये हुए लम्हों को याद करते हैं? तो हम आपको इस सब सवालों का जवाब दते हैं और बताते हैं इस दिन के मायने..

दरअसल फ्रेंडशिप डे पश्चिमी सभ्यता की सोच और मांग है जहां के एकल जीवन में अकसर दोस्तों का महत्व बेहद कम हो जाता है। लोगों के जीवन में कम होती दोस्ती की अहमियत को सझते हुए तथा दोस्तों का जीवन में बनेेेे रहने पर उनका आभार व्यक्त करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस ने सन 1935 में फ्रेंडशिप डे मनाने की घोषणा कर दी थी। अमेरिकी कांग्रेस के इस घोषणा के बाद हर राष्ट्र में अलग-अलग दिन फ्रेंडशिप डे मनाया जाने लगा। विश्व के अधिकतर देशों में यह दिन अगस्त के पहले रविवार को मनाया जाता है।  सन 2011 से संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस दिन को एकरूपता देने और पहले से अधिक धूमधाम से मनाने के उद्देश्य से 30 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय फ्रेंडशिप डे घोषित कर दिया लेकिन बावजूद इसके अधिकतर देशों में इसे अगस्त के पहले रविवार को ही मनाया जाता है भले तारीख कुछ भी हो।

दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जो हमारे जन्म से नहीं होता। इस खूबसूरत रिश्ते को हम खुद बनाते हैं। इस रिश्ते पर हम सबसे अधिक भरोसा करते हैं। दोस्तों से हम अपने मन की हर बात कर लेते हैं। दोस्ती का रिश्ता जात-पांत, लिंग भेद तथा देश की सीमाओं को नहीं जानता। ‘दोस्त’ कहने को तो हज़ारों मिल जाते हैं लेकिन अच्छे दोस्तों का कोई मोल नहीं होता। इन दोस्तों के लिए हमें कोई मोल तो नहीं चुकाना होता लेकिन इनकी दोस्ती बहुत अनमोल होती है। एक सच्चा दोस्त आपकी जिंदगी को सही राह पर ले जाने में बहुत सहायक होता है. जो जादू बड़े से बड़े जादूगरों में नहीं होता वह अकसर दोस्तों में होता है और इन्हीं दोस्तों को समर्पित है “फ्रेंडशिप डे”।

कभी आभास तो कभी एहसास है दोस्ती।
टेढ़ी मेढ़ी जलेबी कि तरह, पर शहद की मिठास है दोस्ती।।

भारत में फ्रेंडशिप डे

फ्रेंडशिप डे तो भारत में भी सभी देशों की तरह एक ही दिन को मनाना शुरू हुआ था लेकिन भारत में प्राचीन सभ्यता से ही दोस्ती की कई मिसालें हमारे प्राचीन ग्रंथों में पढ़ने को मिलती हैं। भगवान राम की वानर राज सुग्रीव से दोस्ती, भगवन श्री कृष्ण की सुदामा से दोस्ती, वीर अर्जुन की अपने सखा श्री कृष्ण से दोस्ती। प्राचीन ग्रंथों में विद्यमान  दोस्ती की इन मिसालों को भला भुलाया कैसे जा सकता है। दोस्ती की रिश्ते में दोस्तों के लिए हमेशा एक समर्पण भाव होता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण महाभारत का योद्धा कर्ण है, जो अपने मित्र दुर्योधन के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित था। तभी तो दोस्ती की मिसाल देते हुए अक्सर कहा जाता है कि “जीवन में एक मित्र श्री कृष्ण जैसा अवश्य होना चाहिए जो तुम्हारी तरफ से युद्ध तो ना करे लेकिन तुम्हें सही मार्ग पर चलने के लिए तुम्हारा मार्गदर्शन अवश्य करे, और एक मित्र सूरवीर कर्ण जैसा भी अवश्य होना चाहिए जो संकट की घड़ी में चट्टान बनकर तुम्हारे आगे खड़ा रहे “।

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s