माना गीदड़ भभकी, लेकिन इसे गंभीरता से ले सरकार

एक खत और माहौल तनावपूर्ण। देश की न्यायपालिका में एक बार फिर से उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गयी जब सुप्रीम कोर्ट के जज दीपक मिश्र को
जान से मारने की धमकी वाला खत मिला। ये खबर और भी चिंताजनक इसलिए भी हो जाती है क्यूंकि दीपक मिश्र सुप्रीम कोर्ट के वही जज हैं जिन्होंने याकूब मेमन की फांसी के पुष्टि की थी। इस खत में लिखा है कि “”चाहे जितनी भी सुरक्षा मिली हो, हम तुमको ख़त्म कर देंगे”। इस धमकी को अधिक गंभीरता से लेना इसलिए भी बेहद जरूरी है क्यूंकि जब 30 जुलाई को याकूब मेमन को फांसी दी जानी थी उससे तकरीबन डेढ़ घंटा पहले 1993 मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड टाइगर मेमन ने “वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल” के जरिये अपनी माँ से फ़ोन पर याकूब को फांसी देने वालों से बदला लेने की बात कही थी। टाइगर ने फोन पर अपनी माँ से कहा कि, ” सबके आंसू जाय नहीं जाएंगे। उनको इसकी कीमत चुकानी होगी”। हालांकि उसकी माँ ने उसे ऐसा करने से मना किया लेकिन वो लगातार अपनी बातचीत में बदला लेने की बात बोलता रहा।

इन सब बातों के बाद सरकार इस धमकी को हल्के में नहीं ले सकती। उन्हें इस बात को पूरी गंभीरता से लेना होगा और न्यायपालिका की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करना होगा। सरकार इस बात को इसलिए भी नजरअंदाज नहीं कर सकती कि ये धमकी उन लोगों की तरफ से दी गयी है जिनके लिए बेगुनाहों का खून बहाना कोई नयी बात नहीं है। ये वही लोग है जो 22 साल पहले मुंबई में खून-खराबा मचा चुके हैं और आज भी भारत की एकता और अखन्ड्ता को तोड़ने के प्रयास में लगे हैं। हालांकि यह सबको पता है कि वो ऐसा इसलिए कर पाते हैं क्यूंकि पाकिस्तान उन्हें अपने देश में पनाह दिए हुए है। इस बात के भी पुख्ता सबूत हैं कि पाकिस्तानी सरकार भी उन्हें भारत में क़त्ल-ए-आम मचाने में सहयोग कर रही है। पाकिस्तान सरकार का हाथ इनकी पीठ पर होने की वजह से ही ये दुनिया में खासकर भारत में अपनी आतंकी गतिविधियों को बेखौफ अंजाम देने में कई बार सफल हुए हैं।

याकूब मेमन की फांसी से पहले और बाद क्रमशः दीनानगर तथा उधमपुर बीएसएफ कैम्प पर हुए आतंकवादी हमले ने न्यायमूर्ति दीपक मिश्र को दी गयी धमकी को और भी संगीन बना दिया है। पाकिस्तान भी निरंतर दाऊद इब्राहिम तथा टाइगर मेमन की मदद से भारत विरोधी आतंकवादी गतिविधियों को तेज करने में प्रयासशील है। ऐसे में इस बात को ठुकराया नहीं जा सकता कि दाऊद इब्राहिम के अंडरवर्ल्ड के लोग भारत में किसी बड़ी शख्सियत को निशाना बनाने की फ़िराक में हों। प्रधान न्यायधीश एचएल दत्तू ने निडरता का परिचय देते हुए कहा कि जजों पर न्यायपालिका की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। इसलिए जज ऐसी धमकियों से बेखौफ रहते हुए अपना काम करते है। ऐसी धमकियों से घबराने की जरूरत नहीं है।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत की न्यायपालिका भविष्य में भी ऐसे अपराधियों को कड़ी से कड़ी सज़ा देने के लिए कभी पीछे नहीं हटेगी। पर सरकार किसी भी जानलेवा घटना होने का अंदेशा होने पर उसे नजरअंदाज नहीं कर सकती। केवल न्यायमूर्ति दीपक मिश्र को ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण सर्वोच्च न्यायालय, याकूब मामले से जुड़े जजों तथा गवाहों को भी कड़ी सुरक्षा मिलनी चाहिए। हालंकि सरकार ने इस धमकी भरे खत पर अपना रूख साफ़ करते हुए कहा कि देश किसी भी आतंकी की गीदड़ भभकियों से नहीं डरेगा। लेकिन माना गीदड़ भभकी ही सही पर सरकार इसे गंभीरता से ले। सरकार को लोगों के सामने ये सन्देश स्थापित करना होगा कि दहशतगर्द चाहे किसी भी रूप में छिपकर आएं, उन्हें मुहतोड़ जवाब मिलेगा। देश के न्यायपालिका की सुरक्षा में कोई भी कसर बाकी नहीं रहेगी। देश के शांतिमय माहौल व् एकता तथा अखन्ड्ता को नुक्सान पहुँचाने वाले दहशतगर्दों का अंजाम अफजल गुरु, अजमल कसाब तथा याकूब मेमन जैसा ही होगा।

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