जल है तो अगला पल है – विश्व जल दिवस पर विशेष

आज बड़ा अच्छा दिन है. आज विश्व जल दिवस है. हालांकि मैं पानी को सहेजने के लिए किसी एक दिन या अवसर का समर्थक नहीं. यह तो हमारे जीवन जीने के स्वाभाव में होना चाहिए कि पानी के प्रति अपनापन दिखाएं. लेकिन फिर भी आज के दिन के इस अवसर पर एक अच्छी खबर देख रहा हूँ कि राजधानी दिल्ली में लोग पानी को लेकर काफी संवेदनशील दीखते हैं. थोड़ी समझदारी खुद दिखा रहे हैं और थोड़ा कमाल कानून का भी है जिसने पानी व्यर्थ गंवाने पर जुर्माना करने तोहफा दिल्ली वालों को दे रखा है. या यूं कह लीजिये कि 2 रूपए खर्च कर जब छोटा सा गिलास पीने को मिलता है तो पानी की कीमत समझ आ ही जाती है. मैं भी पहले से काफी समझदार हुआ हूँ लेकिन सिर्फ पानी के प्रति. व्यर्थ नहीं गंवाता हूँ.

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एक तरीका पानी बचाने का शेयर करता हूँ. थोड़ा अटपटा लगेगा लेकिन कामगार है. मेरे लिए तो है. आपको शायद ध्यान हो बच्चों के लिए नहाने के रबर के छोटे बड़े टब आते हैं मैंने भी अपनी भांजी के लिए खरीद था 230 का. साइज़ भी ठीक-थक सा है. मैं आराम से बैठ लेता हूँ उसमे. उसमे बैठ कर नहाता हूँ. उसमे पानी इकठ्ठा हो जाता है उसको मैं एक अलग राखी हुई बाल्टी में भर लेता हूँ और वाशरूम में प्रयोग कर लेता हूँ. क्योंकि दिल्ली में पानी समय पर ही अत है जिसके पैसे भी लगते हैं यानि कि जितना प्रयोग करो उस हिसाब से बिल. तो मैं ये तरीका रेगुलर प्रयोग में ला रहा हूँ. पहले जब दिमाग में आया था तब बड़ा बोरियत वाला काम लगता था लेकिन आजकल दिनचर्या का काम है. कभी कभी तो नहाने को दूर से प्रणाम कर के अधिक पानी बचा पता हूँ. लेकिन अच्छा लगता है कि पानी व्यर्थ नहीं गंवा रहा. आप भी अपना के देखिये. या कोई और तरीका ढूंढिए और हमसे भी शेयर कीजिये. यकीन मानिये उस बच्चों वाले टब पर लगाए 230 रूपए बड़े अच्छे से वसूल हुए हैं पानी बचाकर. भांजी को उससे बड़ा और अच्छा टब ले कर देने की सोचा है.

आप भी अगर जल संरक्षण का कोई अनोखा तरीका जानते हों तो शेयर जरूर करें. शायद वो मुझे मेरे इस तरीके से भी आसान लगे. लेख अच्छा लगे तो शेयर कीजियेगा. धन्यवाद ! जल ही जीवन है. इसे जरूरत के हिसाब से ही इस्तेमाल करें.

गोविन्द सलोता

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